API Full Form in Pharma: फार्मा में एपीआई क्या है और कैसे बनता है?

API full form in pharma: API का फुल फाॅर्म Active Pharmaceutical Ingredients होता है, जिसे हिंदी में सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री कहा जाता है। किसी भी दवा को वह हिस्सा जो किसी स्थिति का इलाज करने के लिए बाॅडी पर इच्छित स्वास्थ्य प्रभाव पैदा करता है उसे एपीआई कहते हैं। कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेत्र विज्ञान आदि जैसे रोगों को ठीक करने के उद्देश्य से दवाओं में सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) का अनुप्रयोग है। सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) (Active Pharmaceutical Ingredients) का एक उदाहरण एसिटामिनोफेन है, जो दर्द निवारक गोलियों में पाया जाता है, यह एक सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक का एक नमूना है।

आपको बता दें, 2020 में जब कोरोना महामारी शुरू हुई और चीन में आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) गंभीर रूप से बाधित हुई, तो कच्चे माल की कमी की वजह से फार्मा उद्योग कुछ समय के लिए अधिक प्रभावित हुआ था। 

सक्रिय फार्मा सामग्री (एपीआई) कच्चे माल हैं, जो दवाओं के निर्माण में जाते हैं। वर्तमान में चीन विश्व का सबसे बड़ा एपीआई निर्माता बन चुका है और इसके बाद यूएस और भारत है। गौरतलब है कि, उनके बीच का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। भारत के लिए बड़ा लाभ संभावित विकास अवसर है। वहीं अगर आप किसी दूसरे देश से मेडिकल के फील्ड में आगे बढ़ना चाहते हैं और नर्सिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं तो आपको बता दें, कनाडा आपके लिए सबसे बेस्ट रहेगा। यदि आप कनाडा में नर्सिंग कोर्स करना चाहते हैं तो इस दिए गए लिंक पर Nursing course in Canada क्लिक करके यहां से सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

इस ब्लाॅग में हम आपको एपीआई के बारे में विस्तार से समाझाएंगे। जो कि नीचे step by step बताया गया है। इसलिए नीचे दिए गए निम्नलिखित चीजों को आप ध्यानपूर्वक पढ़ें: 

 चलिए जानते हैं फार्मा में एपीआई क्या है और इसका मुख्य रोल क्या है?

1. फार्मा में एपीआई (API) किसे कहते हैं?

एपीआई के बारे में जानने के लिए नीचे दिए गए points को पढ़ें: 

  • एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) दवाओं में मौजूद ऐसे घटक होते हैं जो बाॅडी के जरुरी हिस्से को राहत देते हैं और कारण का इलाज करते हैं।
  • एपीआई शरीर में वांछित प्रभाव पैदा करता है जैसे पेरासिटामोल क्रोसिन के लिए एपीआई है, जो बुखार और शरीर में दर्द के दौरान राहत प्रदान करता है।
  • उनके उपयोग की वजह से वे अक्सर कच्चे माल के साथ भ्रमित (confused) होते हैं, लेकिन वास्तव में कच्चे माल रासायनिक यौगिक होते हैं जो एपीआई के निर्माण के लिए आधार प्रदान करते हैं।
  • लाइफस्टाइल में बदलाव और बीमारियों के बढ़ते कारणों ने एपीआई के लिए एक आकर्षक अवसर प्रदान किया है। हालांकि उनकी निर्माण लागत बहुत ज्यादा है और वे सख्त नियमों और विनियमों द्वारा शासित (governed) किया हुआ हैं।
  • बढ़ते हेल्थ व्यय (Health Expenditure) और इस फील्ड में बढ़ते अनुसंधान और विकास जैसे विभिन्न कारकों ने पूर्व एशिया को एपीआई का उच्चतम निर्माता बना दिया है।

2. एपीआई (API) कैसे बनाया जाता हैं? 

एपीआई बनाने वाले पहले प्रासंगिक (relevant) कच्चे माल का अधिग्रहण करते हैं। एपीआई बनने से पहले कई रासायनिक यौगिक इंटरमीडिएट नामक प्रक्रिया से होकर गुजरते हैं। फिर उत्पादन प्रक्रिया (production process) में कई अलग-अलग तरह के मध्यवर्ती होते हैं जो कच्चे माल को एपीआई में बदल देते हैं। विनिर्माण (manufacturing) के बाद, एपीआई को इसकी अति-शुद्धता (ultra-purity) की पुष्टि करने के लिए कठोर गुणवत्ता जांच और विश्लेषण (Analysis) के जरिए लिया जाता है, ताकि वांछित गुणवत्ता मानदंडों पर मैप किया जा सके।

3. दवा निर्माताओं को एपीआई (API) कैसे मिलती है? 

इससे पहले, दवा निर्माता अपनी खुद की एपीआई बनाते थे। जबकि, हाल के दिनों में, ज्यादा से ज्यादा कंपनियां महंगे उपकरण (equipment), बुनियादी ढांचे (Basic Infrastructure) और कर्मचारियों पर लागत बचाने के लिए API को आउटसोर्स कर रही हैं। वे एपीआई निर्माताओं से सक्रिय सामग्री खरीदते हैं और फिर एपीआई को फार्मास्युटिकल एक्सीपिएंट्स के साथ मिलाकर दवा बनाते हैं। इसलिए, अमेरिका में स्थित बहुत सी फार्मास्युटिकल कंपनियां अपने एपीआई को विदेशों से आउटसोर्स करती हैं। जब एपीआई विनिर्माण की बात आती है, तो चीन और भारत मार्केट पर हावी हैं ।

4. एपीआई के आने से फार्मा इंडस्ट्री में बदलाव

फार्मास्युटिकल उद्योग तेजी से बदलता जा रहा है। आपको बता दें, फार्मा में एपीआई ने महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। एक समय में फार्मास्युटिकल कंपनियां शुरू से अंत तक उत्पादन का प्रबंधन (management) करती थी। अब वे API को आउटसोर्स करना पसंद करती हैं। इससे उनकी निचली रेखा में बड़ा अंतर आया है। यह बदलाव और गहरा होगा, उम्मीद है कि और भी कंपनियां इसका अनुसरण करेंगी।

5. भारतीय एपीआई कितने चिकित्सा एप्लीकेशन को पूरा करते हैं

भारतीय एपीआई 7 प्रमुख चिकित्सा एप्लीकेशन को पूरा करते हैं: 

  • ऑन्कोलॉजी (oncology)
  • डायबिटीज (diabetes)
  • कार्डियोवैस्कुलर रोग (cardiovascular disease)
  • दर्द प्रबंधन (pain management)
  • श्वसन रोग (respiratory disease)
  • संक्रामक रोग (infectious disease)
  • केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली संबंधी मुद्दे (central nervous system issues)

6. एपीआई का सबसे बड़ा उत्पादक कौन है? 

  • यूएस और ईयू में कुछ प्रमुख एपीआई निर्माता हैं, जो कुछ मुख्य एपीआई का उत्पादन करते हैं और ग्लोबल मार्केट का एक बड़ा हिस्सा साझा करते हैं।
  • एपीआई निर्माताओं की एक महत्वपूर्ण संख्या एशिया के आसपास मुख्य रूप से भारत और चीन में स्थित है।
  • इसने ज्यादा से ज्यादा दवा कंपनियों को ऐसे देशों में एपीआई निर्माण को आउटसोर्स करने के लिए प्रेरित (Inspired) किया है।

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